रासायनिक खाद के बजाए अब जैविक खेती पर जोर दिया जाएगा

नैनीताल: कुछ समय पहले ही एग्रीकल्चरल एंड इंवायरमेंटल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सोसायटी उत्तराखंड एवं डीएसबी परिसर के भूगोल विभाग के सहयोग से आयोजित दो दिनी सेमिनार सोमवार को संपन्न हुआ. वैज्ञानिकों ने रसायनिक खाद के बजाए जैविक खेती पर जोर दिया. दूसरे दिन विभिन्न देशों के 450 शोधार्थियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए. कुमाऊं विवि के हरमिटेज परिसर सभागार में आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन भी वैज्ञानिकों ने विभिन्न प्रजातियों के बीजों को जीन बैंक में सुरक्षित, संरक्षित करने और उन्हें विलुप्त होने से बचाने के बारे में जानकारी दी. वक्ताओं ने औषधीय पौधों की खेती कर किसानों की आय में वृद्धि करने के गुर भी सिखाए. वहीं समापन समारोह के मुख्य अतिथि कुमाऊं विवि के एचआरडीसी निदेशक प्रो.बीएल साह ने सेमिनार को महत्वपूर्ण बताया.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एग्रीकल्चरल एंड इंवायरमेंटल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष डॉ.सीपी सिंह की ओर से इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में हिंदी को बढ़ावा देने उद्देश्य से दिए गए व्याख्यान की सराहना की गई. जंहा अंत में आयोजक सचिव डॉ.वाजिद हसन ने सभी का आभार जताया. समापन अवसर पर डॉ.पीसी चनियाल, प्रो. डीके सिंह, प्रो. अमर पी खगज आदि थे. सेमिनार में देश विदेश के 1200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.

कुलपति प्रो. राना को मिला लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड: वहीं मिली जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि नैनीताल सेमिनार में कुलपति प्रो. केएस राना को पर्यावरण के क्षेत्र में बेहतरीन कार्यों के लिए लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया. इसके अलावा सेमिनार में डॉ. उमानाथ को विशिष्ट शोध अवार्ड, डॉ. पीसी चन्याल को नेशनल फेलोशिप अवार्ड, डॉ. वीसी शर्मा को बेस्ट जैव प्रौद्योगिकी अवार्ड, अजीत कुमार शर्मा और डॉ. जमील अख्तर को साइंटिस्ट अवार्ड, शोधार्थी उमानाज को बेस्ट पीएचडी शोध अवार्ड से नवाजा गया.