सात भाइयों में सबसे छोटे सदानंद तिवारी ‘नेता बाबा’ का देहान्त

प्रेम शंकर मिश्र
गाजीपुर– कुशल समाजसेवी व ब्राह्मण शुभचिंतक सदानन्द तिवारी का देहान्त हो गया है। समाज सेवी व ब्राह्मण शुभचिंतक सदानन्द तिवारी का राजनीति से बहुत पुराना रिस्ता रहा है। सन 1972 में स्व० सरजू पांडेय के साथ उनके मार्गदर्शन में राजनितिक पारी की शुरुवात कम्युनिष्ट पार्टी से करने के दौरान जन आंदोलनो के चलते बीसों बार जेल जाना पड़ा, पर हर बार पिछली बार से ज्यादा उत्साह के साथ जनता के सुख दुःख की लड़ाई जारी रखी ।
सन 1973 में समाजशास्त्र से परास्नातक (एम्०ए०) व् 1974 में बी०एड० की शिक्षा ग्रहण की।अध्ययन के साथ – साथ खेलों में ( बॉलीबाल, डिस्कस थ्रो, जबलिंग इत्यादि ) भी इनकी रूचि रही ।
इसी दौरान कम्युनिष्ट पार्टी के नौजवान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष बनाये गए , सन 1982 में काम्युनिष्ट पार्टी के अंतराष्ट्रीय प्रेस कांफ्रेंस में सोवियत संघ (रूस) जाकर जनपद का प्रतिनिधित्व किया ।
समय परिवर्तनशील होता है क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभुत्व बढ़ने लगा फलस्वरूप सन 1998 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल होकर जिला उपाध्यक्ष के साथ वाराणसी मंडल के कोआर्डिनेटर का दायित्व संभाला ,अपने जीवनकल में अनेकों बार जनप्रतिनिधि बनने का मौका मिला पर सैद्धान्तिक सहमति न बन पाने के कारण कभी अपने नैतिक सिद्धांतो से समझौता नही किया ।

बाबा सदानंद तिवारी की अंतिम इच्छा पुरी ना होने का मलाल-आलोक तिवारी पंकज “पौत्र”

इनके पौत्र आलोक तिवारी ‘पंकज’ ने फोन पर बताया कि बाबा की हार्दिक इच्छा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में देहदान की थी परन्तु लाँक डाऊन के चलते यह इच्छा अधूरी रह गई जिसका जीवन भर मलाल रहेगा।